रोजमर्रा की भागदौड़ में हम अक्सर अपने शरीर को आराम देने के बारे में तो सोचते हैं, लेकिन दिमाग को शांत करने के लिए समय निकालना भूल जाते हैं। दिनभर काम, मोबाइल, बातचीत और अलग-अलग जिम्मेदारियों के बीच लगातार व्यस्त रहने से मन थका हुआ महसूस कर सकता है। ऐसे में रोज कुछ देर शांत बैठना एक छोटी लेकिन उपयोगी आदत हो सकती है।
शांत रहने का मतलब यह नहीं है कि आप घंटों अकेले बैठे रहें। दिन में सिर्फ 10 से 15 मिनट भी अपने लिए निकालना काफी हो सकता है। इस दौरान मोबाइल को दूर रखें, टीवी बंद करें और किसी शांत जगह पर आराम से बैठें। कुछ देर केवल अपनी सांसों पर ध्यान दें और खुद को बिना किसी काम के आराम करने का मौका दें।
शांत समय के दौरान धीमी और गहरी सांस लेना भी मन को सहज महसूस कराने में मदद कर सकता है। आराम से सांस अंदर लें और धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। इस दौरान काम या दूसरी परेशानियों के बारे में सोचने के बजाय वर्तमान पल पर ध्यान देने की कोशिश करें। शुरुआत में मन बार-बार भटक सकता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत आसान होने लगती है।
अगर घर या ऑफिस में लगातार शोर रहता है, तो शांत समय निकालने के लिए किसी ऐसे कोने को चुना जा सकता है जहां कुछ देर बिना रुकावट बैठ सकें। सुबह का समय, शाम की सैर के दौरान कुछ मिनट या सोने से पहले का शांत समय इसके लिए अच्छा हो सकता है।
हर समय मोबाइल या सोशल मीडिया से जुड़े रहना भी दिमाग को लगातार सक्रिय रखता है। इसलिए दिन में कुछ समय बिना स्क्रीन के बिताना उपयोगी हो सकता है। इस दौरान किताब पढ़ना, खिड़की के बाहर देखना, पौधों के पास बैठना या बस कुछ देर आंखें बंद करके आराम करना भी शांत समय का हिस्सा बन सकता है।
यह आदत केवल मानसिक सुकून के लिए ही नहीं, बल्कि दिनभर की थकान को महसूस करने और अपनी जरूरतों पर ध्यान देने के लिए भी महत्वपूर्ण है। कई बार हम इतने व्यस्त हो जाते हैं कि शरीर और मन के संकेतों पर ध्यान ही नहीं देते। कुछ मिनट का शांत समय हमें अपनी दिनचर्या को थोड़ा धीमा करने का अवसर देता है।
हालांकि, अगर लगातार बेचैनी, बहुत ज्यादा तनाव या नींद से जुड़ी परेशानी बनी रहती है, तो केवल शांत बैठने पर निर्भर रहने के बजाय किसी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हर पल व्यस्त रहना जरूरी नहीं है। रोज कुछ मिनट खुद के साथ शांत रहना भी अच्छी जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सकता है। छोटी-सी यह आदत दिनभर की भागदौड़ के बीच खुद को थोड़ा ठहरने और बेहतर तरीके से महसूस करने का मौका देती है।