शेयर बाजार में गिरावट के बीच कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ते हैं, तो इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इस गिरावट से उनके पोर्टफोलियो को बड़ा नुकसान हो सकता है या फिर यह अच्छे शेयरों में निवेश करने का सही मौका है। दरअसल, भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में क्रूड ऑयल महंगा होने से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ता है और महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है। इसका असर कंपनियों की उत्पादन लागत, मुनाफे और उपभोक्ताओं की खरीदारी क्षमता पर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने पर निवेशक बाजार में सतर्क रुख अपना सकते हैं।
क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनका कारोबार ईंधन और परिवहन पर निर्भर करता है। विमानन, पेंट, टायर, रसायन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों की कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। वहीं, तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव पड़ सकता है, हालांकि इसका वास्तविक असर सरकारी नीतियों, ईंधन की खुदरा कीमतों और कंपनियों की लागत पर निर्भर करेगा। दूसरी तरफ, तेल एवं गैस क्षेत्र की कुछ कंपनियों को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से फायदा भी हो सकता है। इसलिए बाजार में गिरावट आने पर सभी शेयरों को एक ही नजर से देखना सही रणनीति नहीं मानी जाती।
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी सवाल यह है कि ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए। बाजार में गिरावट के दौरान घबराकर शेयर बेच देना कई बार नुकसान को वास्तविक रूप दे सकता है। हालांकि, केवल इस उम्मीद में निवेश बनाए रखना भी सही नहीं है कि बाजार जल्द ही संभल जाएगा। निवेश करने से पहले कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, कर्ज, कमाई और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना जरूरी है। अगर किसी कंपनी के बुनियादी आंकड़े मजबूत हैं और उसके कारोबार पर कच्चे तेल की तेजी का सीमित असर पड़ता है, तो बाजार की गिरावट उसके शेयर उचित कीमत पर खरीदने का अवसर दे सकती है।
नए निवेशक एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड या इंडेक्स फंड में लंबी अवधि के लिए निवेश करने वालों को भी अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की समयसीमा को ध्यान में रखना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान आपातकालीन जरूरतों के लिए रखी गई रकम को शेयरों में लगाना उचित नहीं है। साथ ही, कर्ज लेकर निवेश करने और सोशल मीडिया पर मिलने वाली अपुष्ट शेयर टिप्स के आधार पर खरीदारी करने से बचना चाहिए।