डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक देश, एक एप्लीकेशन’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) को देशभर में तेजी से लागू किया जा रहा है। अब तक 33 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं ने NeVA को लागू करने के लिए केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह जानकारी संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने राज्यसभा में लिखित जवाब में दी।
NeVA प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:
– कुल लागत: 673.94 करोड़ रुपये
– केंद्र सरकार का हिस्सा: 423.60 करोड़ रुपये
– 21 विधानसभाएं: पूरी तरह डिजिटल विधानसभा में तब्दील
आंध्र प्रदेश विधानसभा के दोनों सदनों में NeVA लागू करने के लिए 23.58 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
NeVA के फायदे
मध्य-अवधि मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, NeVA ने विधायी कामकाज की कार्यक्षमता को काफी बढ़ाया है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
– विधायी प्रक्रियाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण
– कागजी कार्यवाही पर निर्भरता में भारी कमी
– दस्तावेजों की छपाई, हैंडलिंग और स्टोरेज में बचत
– विधायी जानकारी तक तेज और बेहतर पहुंच
– कार्यवाही की तेज प्रोसेसिंग और प्रसार
केंद्र सरकार की सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (CPMU) के माध्यम से सभी राज्यों को तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। NeVA प्रोजेक्ट को प्रत्येक राज्य विधानसभा की तैयारियों और आवश्यकताओं के अनुसार लागू किया जा रहा है। यह डिजिटल इंडिया के तहत संसदीय और विधायी प्रक्रियाओं को पारदर्शी, कुशल और पेपरलेस बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। (इनपुट-एजेंसी)