केंद्र सरकार ने मंगलवार को अमृतसर एयरपोर्ट से हब एंड स्पोक (Hub & Spoke) मॉडल के तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाओं की शुरुआत की। इसके साथ ही वाराणसी के बाद अमृतसर इस व्यवस्था से जुड़ने वाला देश का दूसरा एयरपोर्ट बन गया है।
अब तक अमृतसर से केवल सात अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रियों को दिल्ली एयरपोर्ट के वैश्विक नेटवर्क का लाभ अमृतसर से ही मिल सकेगा। इससे वे 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक आसानी से यात्रा कर सकेंगे।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि यात्री अब एक ही चेक-इन और एक ही बैगेज टैग के जरिए अपनी पूरी अंतरराष्ट्रीय यात्रा कर सकेंगे। इससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान और सुविधाजनक होगी।
उन्होंने बताया कि हर साल लगभग 1.5 लाख यात्री अमृतसर से दिल्ली अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़ने के लिए जाते हैं, जबकि करीब 1.5 लाख यात्री विदेश से दिल्ली होते हुए अमृतसर पहुंचते हैं। नई व्यवस्था से यात्री संख्या में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
नई प्रणाली के तहत अंतरराष्ट्रीय यात्री अमृतसर एयरपोर्ट पर ही चेक-इन, इमिग्रेशन और कस्टम्स की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। उनका सामान अंतिम अंतरराष्ट्रीय गंतव्य तक सीधे भेजा जाएगा। दिल्ली पहुंचने पर उन्हें दोबारा इमिग्रेशन या कस्टम्स की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा और वे सीधे अपनी अगली अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सवार हो सकेंगे।
गौरतलब है कि भारत में हब एंड स्पोक मॉडल की शुरुआत 25 जून 2026 को वाराणसी एयरपोर्ट से हुई थी। पिछले एक महीने में वाराणसी से यात्रा करने वाले यात्रियों को दिल्ली के माध्यम से 18 अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से जोड़ा गया है।
राम मोहन नायडू ने कहा कि दिल्ली हब के रूप में काम करेगा, जबकि अमृतसर पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार बनेगा। उन्होंने कहा कि अमृतसर की बड़ी प्रवासी भारतीय आबादी और क्षेत्रीय महत्व को देखते हुए इस पहल से सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है।
सरकार के अनुसार, इस पहल से केवल यात्रियों को ही सुविधा नहीं मिलेगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
अध्ययन के अनुसार, 2030 तक हब एंड स्पोक मॉडल से लगभग 4 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हो सकते हैं और इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में 30 अरब डॉलर का अतिरिक्त योगदान मिलने का अनुमान है। वहीं 2047 तक यह मॉडल करीब 1.6 करोड़ रोजगार सृजित कर सकता है और अर्थव्यवस्था में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का योगदान दे सकता है।